Meditation on the Gita

  ॐ पार्थाय प्रतिबोधितां भगवता नारायणेन स्वयं। व्यासेन ग्रथितां पुराणमुनिना मध्ये महाभारतं॥ अद्वैतामृतवर्षिणीं भगवतीमष्टादशा ध्यायिनीमम्ब। त्वामनुसंदधामि भगवद् गीते भवद्वेषिणीम्॥ Om paarthaaya pratibodhitaam bhagavataa naaraayanenaswayam,  Vyaasena grathitaam puraanamuninaa madhye mahaabhaaratam;  Advaitaamritavarshineem bhagavateem ashtaadashaa dhyaayineem,  Amba twaam anusandadhaami bhagavadgeete bhavadweshineem.  Om. O Bhagavad Gita, with which Partha was illumined by Lord Narayana Himself, and which was composed [...]

Glory of the Gita – 9

देहं मानुषमाश्रित्य चातुर्वर्ण्ये तु भारते। न श्रृणोति पठत्येव ताममृतस्वरूपिणीम्।।37।। हस्तात्त्याक्तवाऽमृतं प्राप्तं कष्टात्क्ष्वेडं समश्नुते पीत्वा गीतामृतं लोके लब्ध्वा मोक्षं सुखी भवेत्।।38।। भरतखण्ड में चार वर्णों में मनुष्य देह प्राप्त करके भी जो अमृतस्वरूप गीता नहीं पढ़ता है या नहीं सुनता है वह हाथ में आया हुआ अमृत छोड़कर कष्ट से विष खाता है | किन्तु जो [...]

Glory of the Gita – 8

  गीता गंगा च गायत्री सीता सत्या सरस्वती। ब्रह्मविद्या ब्रह्मवल्ली त्रिसंध्या मुक्तगेहिनी।।30।। अर्धमात्रा चिदानन्दा भवघ्नी भयनाशिनी। वेदत्रयी पराऽनन्ता तत्त्वार्थज्ञानमंजरी।।31।। इत्येतानि जपेन्नित्यं नरो निश्चलमानसः। ज्ञानसिद्धिं लभेच्छीघ्रं तथान्ते परमं पदम्।।32।। गीता, गंगा, गायत्री, सीता, सत्या, सरस्वती, ब्रह्मविद्या, ब्रह्मवल्ली, त्रिसंध्या, मुक्तगेहिनी, अर्धमात्रा, चिदानन्दा, भवघ्नी, भयनाशिनी, वेदत्रयी, परा, अनन्ता और तत्त्वार्थज्ञानमंजरी (तत्त्वरूपी अर्थ के ज्ञान का भंडार) इस प्रकार [...]

Glory of the Gita – 7

नोपसर्पन्ति तत्रैव यत्र गीतार्चनं गृहे। तापत्रयोद्भवाः पीडा नैव व्याधिभयं तथा।।21।। जिस घर में गीता का पूजन होता है वहाँ (आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक) तीन ताप से उत्पन्न होने वाली पीड़ा तथा व्याधियों का भय नहीं आता है | (21) न शापो नैव पापं च दुर्गतिनं च किंचन। देहेऽरयः षडेते वै न बाधन्ते कदाचन।।22।। उसको शाप [...]

Glory of the Gita – 6

मलनिर्मोचनं पुंसां जलस्नानं दिने दिने। सकृद् गीताम्भसि स्नानं संसारमलनाशनम्।।11।। हर रोज जल से किया हुआ स्नान मनुष्यों का मैल दूर करता है किन्तु गीतारूपी जल में एक बार किया हुआ स्नान भी संसाररूपी मैल का नाश करता है |(11) गीताशास्त्रस्य जानाति पठनं नैव पाठनम्। परस्मान्न श्रुतं ज्ञानं श्रद्धा न भावना।।12।। स एव मानुषे लोके पुरुषो [...]

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